संतोषी माता का व्रत पूजन विधि एवं कथा - Santoshi Mata Vrat Vidhi and Katha
(shukravar Vrat Vidhi and Katha)

सृष्टि के सभी प्राणियों का कल्याण करने वाले भगवान शंकर के पुत्र श्री गणेश महाराज और माता ऋद्धि-सिद्धि की पुत्री संतोषी माता विश्व के सभी उपासक स्त्री-पुरुषों का कल्याणकरती है। अपना व्रत करने तथा कथा सुननेवाले स्त्री-पुरुषों के धन-सम्पत्ति से भण्डार भरकर संतोषी माता उन्हें पृथ्वीलोक के सबसे बड़े सुख यानी “संतोष” धन से आनंदित करती हैं । व्यवसाय में दिन दूना और रात चौगुना लाभ होता है। शोक-विपत्ति नष्ट होती है और मनुष्य चिंता मुक्त होकर जीवन-यापन करता है। संतोषी माता का विधिवत् व्रत करने, गुड़ और चने का प्रसाद ग्रहण करने से कन्याओं को सुयोग्य वर मिलता है। स्त्रियाँ सदा सुहागन रहती हैं। नि:संतानों को पुत्र की प्राप्ति होती है। जीवन में सभी मनोकामनाएँ संतोषी माता के व्रत से पूरी होती है।

संतोषी माता व्रत पूजा की सामग्री:- Material for worship (pujan samagree)
√ घी का दिया
√ कलश पात्र
√ चना
√ गुड़
√ संतोषी माता की मूर्ति अथवा चित्र
√ धूप

संतोषी माता का व्रत पूजन विधि - Santoshi Mata Vrat Vidhi
(shukravar Vrat Vidhi)

संतोषी माता का व्रत शुक्रवार को किया जाता है। शुक्रवार को सुर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि करके, मंदिर में जाकर ( या अपने घर पर संतोषी माता का चित्र या मुर्ति रखकर) संतोषी माता की पूजा करें । पूजा के समय एक कलश में ताजा स्वच्छ जल भरकर रखें। उस कलश पर एक पात्र रखें और उस पात्र में गुड़ और चने भरकर रखें। घी का दीपक जलाकर संतोषी माता की कथा सुनें या स्वयं पुस्तक पढ़कर उपस्थित भक्तजनों को व्रत्कथा सुनाएँ। संतोषी माता की व्रत कथा को सुनते अथवा दूसरों को सुनाते समय गुड़ और भूने हुए चने हाथ में रखें। व्रत्कथा समाप्त होने पर “संतोषी माता की जय” बोलकर उठें और हाथ में लिए हुए गुड़ और चने गाय को खिलाएँ। कलश पर रखे गए पात्र के गुड़ और चने को प्रसाद के रूप में उपस्थित सभी स्त्री-पुरुषों और बच्चों में बाँट दें। कलश के जल को घर के कोने-कोने में छिड़ककर घर को पवित्र करें। शेष बचे हुए जल को तुलसी के पौधे में डाल दें।

संतोषी माता का व्रत कथा प्रारम्भ - Santoshi Mata fast Story Starts - Page 1 /14

santoshi mata vrat katha

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There was an old lady, she had seven sons. Her 6 sons were earning while 7th younger son was worthless. She prepared food for all six sons and feed them. She gave leftovers food to her seventh son. One day 7th son told to his wife- Look, How much my mother loved me. His wife replied- “Why not, she feeds you leftovers food of others”. He told- “It is not possible. I could not believe on this unless I see with my eyes” Wife said with smile- “Let’s seen, then believe”
There was a festival after some time .Seven types of food and laddu had made at home. He wanted to find the truth. So, he complained for a headache and slept in a kitchen by covered his body with thin cloth. He looked all from cloth. Six brothers came to food. He saw, Mother laid beautiful mat, served various food items and urged them to eat. He had been looking. All six brothers finished their meal and went. Mother had collected pieces of laddu from leftovers food and made laddu.